Footwear Acquiring Things To Consider For Professionals And Rookies

What in your wardrobe could make or crack us? If you’re like many people, you clarified boots. Footwear can be quite a wonderful accessory for an clothing, however they could also have the outfit. Regardless if you are a female and love heels or perhaps a gentleman who adores shoes, everybody loves footwear. Keep reading for a couple of footwear recommendations that you can use.

When selecting footwear for any particular sport, purchase ones produced particularly for it. For example, in basketball, common footwear will never ever supply you with the assist that a great pair of football higher tops will. The same goes for athletics like football and basketball. Select footwear which were built specifically for that stresses you’ll experience.

When selecting new fitness boots, tend not to make sure they are do greater than the things they have been created to do. If you pick a strolling shoes, tend not to perform basketball with them. Athletic footwear are designed for certain athletics for a explanation. They gives you extra assist in the places that are needed to the ideal sport activity.

For your forthcoming shoe buy, do not go by what sizing you feel you will be, but choose the best shoes with what suits. Our shoes sizing changes as time passes, even as you become old. In case a sneaker can feel way too tight, consider another dimension up. Don’t just assume which you have the best match for the reason that sizing is the same as your last acquire.

Don’t acquire a couple of footwear that you have issues strolling in. Too many people accomplish this, specifically in relation to gown shoes and high high heels. If you cannot logically use it, then it is a complete waste of dollars. There is likely to be described as a footwear that looks wonderful which is simple to stroll in, so maintain looking.

Usually do not put on the same shoes every single day. This may be definitely attractive, especially in case you have a favorite match, but do your best to protect yourself from it. This will end your ft . from increasingly limber and you will find a possibility which it will cause your boots to obtain an smell.

If you would like exercise an activity or perhaps an backyard exercise, you must opt for some shoes or boots specifically designed for this activity. Try out different sets and judge the one that makes you feel comfortable. You are able to help reduce the health risks of hurting your self although training a sport in the event you wear comfy shoes.

Don’t be scared to visit a thrift retail store to find out if they may have some wonderful shoes or boots for the cheaper price than store. The vast majority of time individuals will donate footwear simply because they didn’t like them and scarcely wore them. You are going to conserve a ton of money as a result and you will never know what you’ll get!

When selecting footwear for your kids, keep in mind the progress factor. Let a little bit more area than usual when purchasing them shoes or boots. This allows for expansion while making certain the footwear isn’t too big. On the other hand, a salesman can assist you in making sure that your child receives Saucony – Mode Footwear that are great for correctly.

Will not besides so as to get one pair of shoes that can satisfy your entire demands. Different pursuits need shoes with various qualities and it is impractical to other than to be able to purchase one multitasking footwear. As an example, running sneakers should be accommodating and padded, whilst wandering shoes must be rigid and accommodating.

To keep all of your house good, placed your boots from the door once you arrive inside of. Even when you only walk in the cement, your shoes or boots get soil as well as other trash outside, and your carpet reveals that soil if you go walking throughout it. Getting boots by the door will keep everyone more happy.

Taking the time out to purchase boots could be less of a laborious task once you learn what you’re doing. This article was composed with you under consideration, supplying straightforward strategies that make your store shopping trips much better than actually. How will you change your shopping type to become far more optimistic?

Our Environment and Nature

माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रोंदे मोहे, एक दिन ऐसा आएगा, मैं रोंदूगी तोहे ||

आज का समय जो हमें सिर्फ अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अग्रसर कर रहा है, सुनने और पढने में बहुत ही अच्छा लगता है ,क्यूंकि हम प्रगति के पथ पर आगे बढ़ते जा रहे है, लेकिन क्या हमें याद है की हमने अपने विकास के लिए न जाने धरती और पर्यावरण को कितना आघात पहुँचाया है या नहीं – जैसे एक माँ को बच्चे के जन्म से उसके परवरिश तक न जाने कितनी कठिनाईयों से गुजरना पड़ता है, यह तो सिर्फ और सिर्फ एक माँ ही जानती है |

आज हम अपने सतत विकास के लिए न जाने कितने वन्य क्षेत्रो को तबाह कर चुके है, उस क्षेत्र में हम अपने रहने के लिए आलिशान घर/ बंगला , काम करने के लिए द्फ्तर खेलने के लिए क्रीडा स्थल, गगन छूती इमारते ऑर न जाने क्या क्या बनाते जाते रहे है बस सब अपने सुख सुविधाओं को देखते हुए |

यदि आज हमारे घर की एक इंच जगह के लिए कोई कब्ज़ा करने या दीवार गिराने आ जाए तो हम कोर्ट कचहरी आदि में चले जाते है, ताज्जुब की बात तो यह है कि यही कोई जंगली जानवर या पक्षी उस घर में घुस  आए तो पक्षीयों को तो उड़ा देते है और जनवारो को वन विभाग को बुला कर उन्हें पकडवा देते है, लेकिन क्या हम जानते है कि जिस जगह पर हम रह रहे है वह कभी उनका घर हुआ करता था ? या नहीं, हम अपने स्वार्थ में इतना डूब चुके है कि उनके बारे में सोचने की फुर्सत ही कहाँ |

समाधान और निवारण

जैसे आज हम लुप्त होती प्रजाती को बचाने के लिए कोई न कोई ठोस कदम उठाते है, ठीक वैसे ही हमें अपने पर्यावरण को बचाने के लिए उठाने पड़ेंगे |

  1. नदियों के लिए |
  2. झीलों के लिए |
  3. तालाबो के लिए |
  4. हरे भरे घास के मैदानों के लिए |
  5. पेड़ पौधो को बचाने के लिए |
  6. अपनी स्वस्थ वायु के लिए |  
  7. उन सभी पशु पक्षियों के लिए जो जंगल काटने के बाद बेघर हो जाते है | हम लुप्त होते पशु पक्षियों की प्रजातियों के संरक्षण के लिए तो ठोस कदम उठाते है लेकिन क्या हमें उनके घर के लिए कोई कदम नही उठाने चाहिए ?

#Dobaat #दोबात #environment #nature

By Vikrant Sharma (admin@dobaat.com)

For future

🙏🏻हम अपना भविष्य तो नहीं देख सकते लेकिन बना तो सकते है ।

अच्छा स्वास्थ्य और अच्छा व्यवहार ।।

अच्छी दींनचर्या और सदाचार ।।

Yoga special #yogatwitter #dobaat

शरीर में स्थित चक्र

!!शरीर में स्थित चक्रों को जागृत करिए!!

1. मूलाधार चक्र :

यह शरीर का पहला चक्र है। गुदा और लिंग के बीच चार पंखुरियों वाला यह “आधार चक्र” है। 99.9% लोगों की चेतना इसी चक्र पर अटकी रहती है और वे इसी चक्र में रहकर मर जाते हैं। जिनके जीवन में भोग, संभोग और निद्रा की प्रधानता है, उनकी ऊर्जा इसी चक्र के आसपास एकत्रित रहती है।

मंत्र : “लं”

कैसे जाग्रत करें : मनुष्य तब तक पशुवत है, जब तक कि वह इस चक्र में जी रहा है.! इसीलिए भोग, निद्रा और संभोग पर संयम रखते हुए इस चक्र पर लगातार ध्यािन लगाने से यह चक्र जाग्रत होने लगता है। इसको जाग्रत करने का दूसरा नियम है यम और नियम का पालन करते हुए साक्षी भाव में रहना।

प्रभाव : इस चक्र के जाग्रत होने पर व्यक्ति के भीतरवीरता, निर्भीकता और आनंद का भाव जाग्रत हो जाता है। सिद्धियां प्राप्त करने के लिए वीरता, निर्भीकता और जागरूकता का होना जरूरी है।

2. स्वाधिष्ठान चक्र –

यह वह चक्र लिंग मूल से चार अंगुल ऊपर स्थित है, जिसकी छ: पंखुरियां हैं। अगर आपकी ऊर्जा इस चक्र पर ही एकत्रित है, वह आपके जीवन में आमोद-प्रमोद, मनोरंजन, घूमना-फिरना और मौज-मस्ती करने की प्रधानता रहेगी। यह सब करते हुए ही आपका जीवन कब व्यतीत हो जाएगा आपको पता भी नहीं चलेगा और हाथ फिर भी खाली रह जाएंगे।

मंत्र : “वं”

कैसे जाग्रत करें : जीवन में मनोरंजन जरूरी है, लेकिन मनोरंजन की आदत नहीं। मनोरंजन भी व्यक्ति की चेतना को बेहोशी में धकेलता है। फिल्म सच्ची नहीं होती. लेकिन उससे जुड़कर आप जो अनुभव करते हैं वह आपके बेहोश जीवन जीने का प्रमाण है। नाटक और मनोरंजन सच नहीं होते।

प्रभाव : इसके जाग्रत होने पर क्रूरता, गर्व, आलस्य, प्रमाद, अवज्ञा, अविश्वास आदि दुर्गणों का नाश होता है। सिद्धियां प्राप्त करने के लिए जरूरी है कि उक्त सारे दुर्गुण समाप्त हो, तभी सिद्धियां आपका द्वार खटखटाएंगी।

3. मणिपुरक चक्र :

नाभि के मूल में स्थित रक्त वर्ण का यह चक्र शरीर के अंतर्गत “मणिपुर” नामक तीसरा चक्र है, जो दस कमल पंखुरियों से युक्त है। जिस व्यक्ति की चेतना या ऊर्जा यहां एकत्रित है उसे काम करने की धुन-सी रहती है। ऐसे लोगों को कर्मयोगी कहते हैं। ये लोग दुनिया का हर कार्य करने के लिए तैयार रहते हैं।

मंत्र : “रं”

कैसे जाग्रत करें: आपके कार्य को सकारात्मक आयाम देने के लिए इस चक्र पर ध्यान लगाएंगे। पेट से श्वास लें।

प्रभाव : इसके सक्रिय होने से तृष्णा, ईर्ष्या, चुगली, लज्जा, भय, घृणा, मोह आदि कषाय-कल्मष दूर हो जाते हैं। यह चक्र मूल रूप से आत्मशक्ति प्रदान करता है। सिद्धियां प्राप्त करने के लिए आत्मवान होना जरूरी है। आत्मवान होने के लिए यह अनुभव करना जरूरी है कि आप शरीर नहीं, आत्मा हैं। आत्मशक्ति, आत्मबल और आत्मसम्मान के साथ जीवन का कोई भी लक्ष्य दुर्लभ नहीं।

4. अनाहत चक्र

हृदय स्थल में स्थित स्वर्णिम वर्ण का द्वादश दल कमल की पंखुड़ियों से युक्त द्वादश स्वर्णाक्षरों से सुशोभित चक्र ही “अनाहत चक्र” है। अगर आपकी ऊर्जा अनाहत में सक्रिय है, तो आप एक सृजनशील व्यक्ति होंगे। हर क्षण आप कुछ न कुछ नया रचने की सोचते हैं.

मंत्र : “हं”

कैसे जाग्रत करें : हृदय पर संयम करने और ध्यान लगाने से यह चक्र जाग्रत होने लगता है। खासकर रात्रि को सोने से पूर्व इस चक्र पर ध्यान लगाने से यह अभ्यास से जाग्रत होने लगता है और “सुषुम्ना” इस चक्र को भेदकर ऊपर गमन करने लगती है।

प्रभाव : इसके सक्रिय होने पर लिप्सा, कपट, हिंसा, कुतर्क, चिंता, मोह, दंभ, अविवेक और अहंकार समाप्त हो जाते हैं। इस चक्र के जाग्रत होने से व्यक्ति के भीतर प्रेम और संवेदना का जागरण होता है। इसके जाग्रत होने पर व्यक्ति के समय ज्ञान स्वत: ही प्रकट होने लगता है। व्यक्ति अत्यंत आत्मविश्वस्त, सुरक्षित, चारित्रिक रूप से जिम्मेदार एवं भावनात्मक रूप से संतुलित व्यक्तित्व बन जाता हैं। ऐसा व्यक्ति अत्यंत हितैषी एवं बिना किसी स्वार्थ के मानवता प्रेमी एवं सर्वप्रिय बन जाता है।

5. विशुद्ध चक्र

कंठ में सरस्वती का स्थान है, जहां “विशुद्ध चक्र” है और जो सोलह पंखुरियों वाला है। सामान्यतौर पर यदि आपकी ऊर्जा इस चक्र के आसपास एकत्रित है, तो आप अति शक्तिशाली होंगे।

मंत्र : “यं”

कैसे जाग्रत करें : कंठ में संयम करने और ध्यान लगाने से यह चक्र Iजाग्रत होने लगता है।

प्रभाव : इसके जाग्रत होने कर सोलह कलाओं और सोलह विभूतियों का ज्ञान हो जाता है। इसके जाग्रत होने से जहां भूख और प्यास को रोका जा सकता है वहीं मौसम के प्रभाव को भी रोका जा सकता है।

6. आज्ञाचक्र :

भ्रूमध्य (दोनों आंखों के बीच भृकुटी में) में “आज्ञा-चक्र” है। सामान्यतौर पर जिस व्यक्ति की ऊर्जा यहां ज्यादा सक्रिय है, तो ऐसा व्यक्ति बौद्धिक रूप से संपन्न, संवेदनशील और तेज दिमाग का बन जाता है लेकिन वह सब कुछ जानने के बावजूद मौन रहता है। “बौद्धिक सिद्धि” कहते हैं।

मंत्र : “ॐ”

कैसे जाग्रत करें : भृकुटी के मध्य ध्यान लगाते हुए साक्षी भाव में रहने से यह चक्र जाग्रत होने लगता है।

प्रभाव : यहां अपार शक्तियां और सिद्धियां निवास करती हैं। इस “आज्ञा चक्र” का जागरण होने से ये सभी शक्तियां जाग पड़ती हैं, व्यक्ति एक सिद्धपुरुष बन जाता है।

7. सहस्रार चक्र :

“सहस्रार” की स्थिति मस्तिष्क के मध्य भाग में है अर्थात जहां चोटी रखते हैं। यदि व्यक्ति यम, नियम का पालन करते हुए यहां तक पहुंच गया है तो वह आनंदमय शरीर में स्थित हो गया है। ऐसे व्यक्ति को संसार, संन्यास और सिद्धियों से कोई मतलब नहीं रहता है।

कैसे जाग्रत करें : “मूलाधार” से होते हुए ही “सहस्रार” तक पहुंचा जा सकता है। लगातार ध्यान करते रहने से यह “चक्र” जाग्रत हो जाता है और व्यक्ति परमहंस के पद को प्राप्त कर लेता है।

प्रभाव : शरीर संरचना में इस स्थान पर अनेक महत्वपूर्ण विद्युतीय और जैवीय विद्युत का संग्रह है। यही “मोक्ष” का द्वार है। —