Air Pollution in City.jpg

Air pollution is a threat to all living organisms on Earth

वायु प्रदुषण धरती पर रहने वाले सभी जीवधारियो के लिए खतरा |प्रत्यक्ष को प्रमाण की क्या ज़रुरत ||

वायु प्रदुषण आज के समय में एक गंभीर समस्या बन गया है, लगता है इसके लिए कोई ठोस उपाय नही निकल रहा है,

क्या प्रदुषण के लिए सिर्फ आस-पास के किसानो को ही जिम्मेवार समझा जाए ?

या फिर वे सभी फेक्ट्री / कारखाने जो लाखों लोगो की आजाविका का साधन है ?

अगर सवालों को देखेंगे तो जवाब खोजने के लिए समय बीत जाएगा |

प्रदुषण आज एक ऐसी समस्या जो किसी देश की न होकर बल्कि समूचे विश्व की है, और इसे हमें विश्विक मुद्दा समझकर चर्चा करनी चाहिए, न कि इसे राजनितिक मुद्दा बनाया जाए, यदि इस पर सभी मिलकर विचार नहीं करेंगे तो एक दिन ऐसा आएगा के विचार करने के लिए हम नहीं होंगे |सरकार द्वारा बहुत सी परियोजनाए चलाई जा रही है लेकिन हम इस पर काबू नहीं कर पा रहे है,

  • मानव 24 घण्टे में लगभग 22,000 बार साँस लेता है तथा इसमें प्रयुक्त वायु की मात्रा लगभग 35 गैलन या 16 किग्रा है। ऐसी वायु जो हानिकारक अवयवों से मुक्त हो, उसे शुद्ध वायु कहते हैं। वायु के मुख्य संघटकों में नाइट्रोजन, ऑक्सीजन एवं कार्बन डाइ ऑक्साइड हैं।
  • वायु प्रदूषण के संपर्क में आने के कारण हृदयाघात, हृदय रोग, फेफड़ों का कैंसर, पुरानी अवरोधक फुफ्फुसीय बीमारियाँ (chronic obstructive pulmonary diseases), श्वसन संक्रमण के साथ-साथ निमोनिया जैसी गंभीर बीमारियाँ उपजती है।
  • हेल्थ ऑफ द नेशंस स्टेट्स’ (Health of the Nation’s States) के अनुसार, भारत में होने वाली कुल बीमारियों में से 5% के लिये घरेलू वायु प्रदूषण और 6% के लिये बाह्य वायु प्रदूषण ज़िम्मेदार थे।
  • सर्दियों के मौसम के दौरान फसल अवशेषों को जलाए (Crop Residue Burning-CRB) जाने से PM10 (पार्टिकुलेट मैटर्स) में 17% और PM2.5 में 16% की वृद्धि होती है। फसल अवशेषों को जलाने की समस्या मुख्य रूप से धान उत्पादक राज्यों के किसानों द्वारा फसल अवशेषों को जला दिया जाता है।

हमें सबसे पहले इसके समाधान के बारे में सोचना होगा |

By:- #Choudhary Diya Jatti

  • आपके क्या विचार या सुझाव है हमें लिखे :-
  • admin@dobaat.com, ipsrma@gmail.com

Facebook :- https://www.facebook.com/dobaaten/

#air #pollution #today #Life

Water, Earth and Forest

जल, जंगल और जमीन है जब तक | इस प्रथ्वी पर हमारा अस्तित्व है तब तक||

जल, जंगल और जमीन जो हमारे अस्तित्व को बचाए हुए है, लेकिन अब ऐसा लगता है कुछ ही दिनों में हम ये सब खो देंगे, कहते है | हम भोजन के बिना एक माह से अधिक जीवित रह सकते हो, परन्तु जल के बिना तो एक सप्ताह से अधिक जीवित नहीं रह सकते ।

जल हमारे जीवन का बहुत ही मुल्व्यवान तत्व है, जिसके बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती, जल प्रथ्वी पर और मनुष्य के शरीर में भी लगभग 70% है | जिससे हम सोच बैठते है की हमारी प्रथ्वी पर बहुत पानी है, लेकिन इससे ये तो पता नहीं चलता है की यहाँ सब पीने योग्य है | पृथ्वी पर उपलब्ध कुल पानी में से मीठा जल लगभग 2.7% प्रतिशत है । और इसमें से भी लगभग 75.2 प्रतिशत धुव्रीय प्रदेशों में हिम के रूप में विद्यमान है और 22.6% प्रतिशत भूजल के रूप में विद्यमान है।  शेष जल झीलों, नदियों, वायुमंडल, नमी, मृदा और वनस्पति में मौजूद है। उपयोग और अन्य इस्तेमाल के लिए प्रभावी रूप से उपलब्ध जल की मात्रा बहुत थोडी है जो नदियों, झीलों और भूजल के रूप में उपलब्ध है।

जल अति सोचनीय विषय है, और यू कहे तो यह विषय न होकर हमारा जीवन ही है| लेकिन हम बस इसके बारे में कुछ शब्द पढेंगे या लिखेंगे और अपनी रोजमर्रा की भागदौड की जिन्दगी में भूल जायेंगे, की इसको बचाना भी है| आज अगर हम घर में या कही घुमने भी जाए तो पीने के लिए पानी भी मिनरल वाला चाहिए, लेकिन क्या हम ये सोचते है कि आज धरती पर पीने योग्य पानी की उपलब्धता के कारण ही हम पानी पी पाते है, और अगर कल यह नही होगा तो क्या ?

समाधान :- हम चाहे तो क्या नही कर सकते, बस चाहिये तो कुछ करने का जज्बा, और ये शुरुआत सिर्फ हम ही कर सकते है | पानी को जितना हो बचा सके उतना बचाया जा सकता है |क्यूंकि बचाव की प्रक्रिया सिर्फ हम से ही शुरू हो सकती है |

  1. प्रतिदिन जितना हो सके पानी बचाए |
  2. नहाने फुवारे के बजाय मग और बाल्टी का प्रयोग किया जा सकता है | या फुवारा प्रेस बटन वाला हो |
  3. हाथ धोने के लिए प्रयोग किया जाने वाला पानी फ्लश बॉक्स से जोड़ा जा सकता है क्यूंकि टॉयलेट में साफ़ पानी के क्या जरूरत | और यदि हो सके तो रसोईघर के सिंक के निकासी पाईप को सीधे फ्लश बॉक्स से जोड़ा जा सकता है | जिससे बर्तन धोने में सर्फ़ मिश्रित पानी सीधे टॉयलेट में प्रयोग किया जा सकता है |
  4. सब्जियों को धोने में प्रयोग किया गया पानी पेड़-पौधो में भी प्रयोग किया जा सकता है |

AC से बर्बाद होता पानी जिसे पार्क या बगीचों में पेड़ पौधो के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है |

उदाहरणार्थ : 1 AC average may produce water in 1 Day= 24 Ltr

  1. अब अगर हम ये देखें कि 1 साल में एक ऐ.सी. कितना पानी निकालता है तो 365 days X 24 Ltr = 8760 Ltr, ये तो एक ऐ.सी. द्वारा बर्बाद किया गया पानी है |
  2. अब हम उस रहने के क्षेत्र को लेते है जहां बहुत सारे परिवार रहते हो , जैसे रेजिडेंशियल कोम्प्लेक्स जिसमे 10 से 15 बहुमंजिला इमारत होती है | एक इमारत की एक मंजिल पर लगभग 4 फ्लेट्स होते है, जिसमे 4 ऐ.सी तो लगे होते है अगर 10 मंजिला इमारत में देखे तो 40 फ्लेट्स होते है |
  3. अब अगर देखे तो 40 Flats = 40 A.C

    01 A.C produce water in 1 day = 24 Ltr

    40 A.C produce water in 1 day = 960 Ltr

    01 A.C produce water in 6 months = 4320 Ltr

    40 A.C produce water in 6 day = 172800 Ltr

    अब हम अंदाजा लगा सकते है कि पूरे देश में कितने ऐसी ऐसे होंगे , जिनसे बहुत सा पानी बर्बाद होता होगा |

यदि सही तरीके का इस्तमाल किया जाए तो कितना पानी बचाया जा सकता है |

आप अपने विचारों को हमारे साथ साझा कर सकते है | admin@dobaat.com

#save water # water #save earth #earth #forest

Our Environment and Nature

माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रोंदे मोहे, एक दिन ऐसा आएगा, मैं रोंदूगी तोहे ||

आज का समय जो हमें सिर्फ अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अग्रसर कर रहा है, सुनने और पढने में बहुत ही अच्छा लगता है ,क्यूंकि हम प्रगति के पथ पर आगे बढ़ते जा रहे है, लेकिन क्या हमें याद है की हमने अपने विकास के लिए न जाने धरती और पर्यावरण को कितना आघात पहुँचाया है या नहीं – जैसे एक माँ को बच्चे के जन्म से उसके परवरिश तक न जाने कितनी कठिनाईयों से गुजरना पड़ता है, यह तो सिर्फ और सिर्फ एक माँ ही जानती है |

आज हम अपने सतत विकास के लिए न जाने कितने वन्य क्षेत्रो को तबाह कर चुके है, उस क्षेत्र में हम अपने रहने के लिए आलिशान घर/ बंगला , काम करने के लिए द्फ्तर खेलने के लिए क्रीडा स्थल, गगन छूती इमारते ऑर न जाने क्या क्या बनाते जाते रहे है बस सब अपने सुख सुविधाओं को देखते हुए |

यदि आज हमारे घर की एक इंच जगह के लिए कोई कब्ज़ा करने या दीवार गिराने आ जाए तो हम कोर्ट कचहरी आदि में चले जाते है, ताज्जुब की बात तो यह है कि यही कोई जंगली जानवर या पक्षी उस घर में घुस  आए तो पक्षीयों को तो उड़ा देते है और जनवारो को वन विभाग को बुला कर उन्हें पकडवा देते है, लेकिन क्या हम जानते है कि जिस जगह पर हम रह रहे है वह कभी उनका घर हुआ करता था ? या नहीं, हम अपने स्वार्थ में इतना डूब चुके है कि उनके बारे में सोचने की फुर्सत ही कहाँ |

समाधान और निवारण

जैसे आज हम लुप्त होती प्रजाती को बचाने के लिए कोई न कोई ठोस कदम उठाते है, ठीक वैसे ही हमें अपने पर्यावरण को बचाने के लिए उठाने पड़ेंगे |

  1. नदियों के लिए |
  2. झीलों के लिए |
  3. तालाबो के लिए |
  4. हरे भरे घास के मैदानों के लिए |
  5. पेड़ पौधो को बचाने के लिए |
  6. अपनी स्वस्थ वायु के लिए |  
  7. उन सभी पशु पक्षियों के लिए जो जंगल काटने के बाद बेघर हो जाते है | हम लुप्त होते पशु पक्षियों की प्रजातियों के संरक्षण के लिए तो ठोस कदम उठाते है लेकिन क्या हमें उनके घर के लिए कोई कदम नही उठाने चाहिए ?

#Dobaat #दोबात #environment #nature

By Vikrant Sharma (admin@dobaat.com)