Our Environment and Nature

माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रोंदे मोहे, एक दिन ऐसा आएगा, मैं रोंदूगी तोहे ||

आज का समय जो हमें सिर्फ अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अग्रसर कर रहा है, सुनने और पढने में बहुत ही अच्छा लगता है ,क्यूंकि हम प्रगति के पथ पर आगे बढ़ते जा रहे है, लेकिन क्या हमें याद है की हमने अपने विकास के लिए न जाने धरती और पर्यावरण को कितना आघात पहुँचाया है या नहीं – जैसे एक माँ को बच्चे के जन्म से उसके परवरिश तक न जाने कितनी कठिनाईयों से गुजरना पड़ता है, यह तो सिर्फ और सिर्फ एक माँ ही जानती है |

आज हम अपने सतत विकास के लिए न जाने कितने वन्य क्षेत्रो को तबाह कर चुके है, उस क्षेत्र में हम अपने रहने के लिए आलिशान घर/ बंगला , काम करने के लिए द्फ्तर खेलने के लिए क्रीडा स्थल, गगन छूती इमारते ऑर न जाने क्या क्या बनाते जाते रहे है बस सब अपने सुख सुविधाओं को देखते हुए |

यदि आज हमारे घर की एक इंच जगह के लिए कोई कब्ज़ा करने या दीवार गिराने आ जाए तो हम कोर्ट कचहरी आदि में चले जाते है, ताज्जुब की बात तो यह है कि यही कोई जंगली जानवर या पक्षी उस घर में घुस  आए तो पक्षीयों को तो उड़ा देते है और जनवारो को वन विभाग को बुला कर उन्हें पकडवा देते है, लेकिन क्या हम जानते है कि जिस जगह पर हम रह रहे है वह कभी उनका घर हुआ करता था ? या नहीं, हम अपने स्वार्थ में इतना डूब चुके है कि उनके बारे में सोचने की फुर्सत ही कहाँ |

समाधान और निवारण

जैसे आज हम लुप्त होती प्रजाती को बचाने के लिए कोई न कोई ठोस कदम उठाते है, ठीक वैसे ही हमें अपने पर्यावरण को बचाने के लिए उठाने पड़ेंगे |

  1. नदियों के लिए |
  2. झीलों के लिए |
  3. तालाबो के लिए |
  4. हरे भरे घास के मैदानों के लिए |
  5. पेड़ पौधो को बचाने के लिए |
  6. अपनी स्वस्थ वायु के लिए |  
  7. उन सभी पशु पक्षियों के लिए जो जंगल काटने के बाद बेघर हो जाते है | हम लुप्त होते पशु पक्षियों की प्रजातियों के संरक्षण के लिए तो ठोस कदम उठाते है लेकिन क्या हमें उनके घर के लिए कोई कदम नही उठाने चाहिए ?

#Dobaat #दोबात #environment #nature

By Vikrant Sharma (admin@dobaat.com)

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