“सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया।

सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, माँ कश्चिद्! दुखभागवेत्।।

“पृथ्वी के पास हमारी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये पर्याप्त संसाधन हैं, न कि हमारे लालच को पूरा करने के लिये।”

पर्यावरण  | प्रदुषण | भूमिगत जल व्यवस्था

 अगर हम घर से ही प्रदुषण को रोके सके तो हमें किसी भी गली, सड़क , तालाब, नदी , नाले या बहार जाकर प्रदुषण को रोकने की ज़रुरत नहीं पड़ेगी..

अत: घर से प्रवाहित होती नालियों में से प्रदुषण को रोका जा सकता है कूड़ा नालियों में लगी जाली के द्वारा घर में ही एकत्रित किया जा सकता है,  और बाद में नगर पालिका  द्वारा संचालित कूड़ा ढोने वाली गाडियों में उडेला जा सकता है, इससे कम से कम नालिया जो बड़े नालो में गिरती है उनमे कूड़ा तो नहीं जाएगा, जिससे बड़े नाले जो नदियों में जा गिरते है उनको तो ज्यादा सफाई की ज़रुरत नहीं पड़ेगी , जिससे कम से कम लागत में पानी को साफ़ करके नदी में प्रवाहित किया जा सकता है जहां हम नदियों को प्रदूषित होने से बचा सकते है |

भूमिगत जल व्यवस्था : – यदि हम नदियों से छोटे छोटे जल प्रवाहा को हर उस क्षेत्र तक पहुंचा दे जहां भूमिगत जल की अत्यधित आवश्यकता कृषि करने में होती है, तो हम भूमिगत जल को जितना हो सके संरक्षित कर पायेंगे |

1:- नदियों से बड़ी पाईप लाइन के द्वारा खेतो की सिचाईयों के लिए जल को पहुँचाया जा सकता है | जिसमे मीटर रीडिंग के माध्यम से न्यूनतम चार्ज किसानो से लिया जा सकता है | इसमें हर छोटे बड़े कृषक को पानी की पूर्ति हो जायेगी |

2:- यदि नदियों से ये पाईप लाइन खेतो व् घरो तक पहुँच जाए तो जल भंडारण के माध्यम से जल को संचियत किया जा सकता है,  और हर जगह जल की पूर्ति की जा सकती है |

3:- इन जल वितरण प्रणाली के माध्यम से होने वाली कमाई को जल भंडारण और संरक्षण  का आधुनिकीकरण में उपयोग किया जा सकता है, जिससे  रोजगार के नए अवसर भी अस्तित्व में आ सकेंगे |

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ipsrma@gmail.com (ViKrant)

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